बिहार में जलवायु परिवर्तन पर सभी राजनीतिक दल आए साथ, CM ने कहा – हम सबको सजग होना पड़ेगा

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बिहार विधान मंडल में सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार

पटना:

बिहार में इस वर्ष पहले सूखा की आशंका व्यक्त की गयी. लेकिन पिछले एक सप्ताह के दौरान जमकर बारिश भी हुई और कई जिलो में बारिश के पानी के कारण बाढ़ की स्थिति हो गयी है. लेकिन इस बीच बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सभी सदस्य शनिवार को राज्य में जलवायु परिवर्तन से उत्पन आपदाजनक स्थिति पर पूरे दिन कारण और निदान बताते रहे. हाल के वर्षों में ये पहला मौक़ा था जब किसी एक मुद्दे पर बिहार विधान मंडल के सदस्य एक साथ सामने आए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ख़ासकर सत्र के दौरान इस असाधारण बैठक की पहल कर स्थिति की गम्भीरता के बारे में सबको आगाह किया. नीतीश कुमार ने जहां तालाब, कुओं, चापाकल सबको एक बार फिर से पुनर्जीवित करने के लिए इसी साल से कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की.

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के प्रति सबको सजग रहने की अपील करते हुए कहा कि आज कई बीमारियों का कारण जलवायु परिवर्तन है. उन्होंने कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ के बाद हिसाब लेती है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही बाढ़ और सूखे की समस्या बढ़ गई है.

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उन्होंने लोगों से अपने घरों के आसपास और अपनी जमीन पर पेड़ लगाने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हम सबको सजग होना पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने बाढ़ और बारिश को लेकर बैठक करने की जानकारी देते हुए कहा कि बाढ़ से निबटने के लिए सरकार की तैयारी पूरी है. मुख्यमंत्री ने मिथिला में जल संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा कैसे हो रहा है, इस पर सोचना होगा. उन्होंने कहा, "तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा, साथ ही सार्वजनिक कुओं को भी ठीक कराया जाएगा."

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मुख्यमंत्री ने खेतों में फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाने की बात करते हुए कहा कि इससे उत्पादकता नहीं बढ़ती है. उन्होंने इस मौके पर कहा कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़तों का है. उन्होंने इस साल लू से हुईं मौतों और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बीमारी के लिए भी जलवायु परिवर्तन को कारण बताया.

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नीतीश ने बिहार में हरित क्षेत्र बढ़ाने का दावा करते हुए कहा कि अभी बड़ी संख्या में पौधे लगाने की जरूरत है. उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, "हम अब नहीं चेते तो फिर हाथ मलते रह जाएंगे." वहीं सदस्यों ने अपने अपने इलाक़े से सम्बंधित सुझाव भी दिए. बिहार ने स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए विचार विमर्श कर पहल तो की है लेकिन अब देखना यह है कि ज़मीन पर इन सुझावों को कब कितनी सजगता से लागू किया जाता है.

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