बिहार… अभी पेंच बाकी है

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रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा (फाइल फोटो)

बिहार में बीजेपी ने भले ही जेडीयू से गठबंधन पक्का कर लिया हो मगर बाकी दलों के साथ अभी भी स्थिति साफ नहीं है. खासकर उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ. कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कई बातों पर स्थिति साफ की है, जैसे बिहार में सीटों के बंटवारे पर वो प्रधानमंत्री से भी मिल सकते हैं. कुशवाहा ने यह भी साफ किया कि उन्हें कितनी सीटें चाहिए इसकी जानकारी उन्होंने बीजेपी के भूपेन्द्र यादव को दे दी है. साथ ही कुशवाहा ने यह भी कहा है कि एनडीए में सीटों के समझौते पर सम्मानजनक समझौता होनी चाहिए. कुशवाहा ने यह भी कहा कि सीटों के बंटवारे पर अभी और बातचीत होनी बाकी है. यही नहीं, कुशवाहा ने यह भी कहा है कि सीटों पर रामविलास पासवान से भी बातचीत होगी.
हालांकि इसका मतलब साफ नहीं है कि यह किस तरह की बातचीत होगी क्योंकि बीजेपी ने पासवान और नीतिश कुमार से अपना गठबंधन फाईनल कर लिया है. पासवान को बीजेपी ने 5 सीटें दी हैं जबकि कुशवाहा को 2 सीट. पिछली बार पासवान ने 6 सीटें जीती थीं और कुशवाहा ने 3 सीट. मगर जैसे ही बीजेपी और जेडीयू ने बराबर की सीटें लड़ने का फैसला किया है कुशवाहा ने भी अपनी ताकत दिखाने की सोची है. वैसे बीजेपी का कहना है कि कुशवाहा के 3 सांसद में से एक बागी हो गया है जिसे बीजेपी अलग से एक सीट दे रही है. बाकी बची दो सीट जो कुशवाहा को दी जा रही हैं.
वैसे बीजेपी की यह दलील भी जायज है. बिहार में बीजेपी ने नीतिश कुमार को काफी सम्मानजनक डील दी है इसलिए उन्होंने अपनी सीट में से कुछ जेडीयू को दी है. वैसे भी बीजेपी को भी मालूम है कि उनके सभी सांसद फिर से नहीं जीतने वाले हैं. दरअसल बीजेपी को पता है कि बिहार में लड़ाई टक्कर की होने वाली है. ऐसे में उन्हें लगता है कि नीतिश कुमार को आगे करके ही चुनाव लड़ना सबसे बेहतर होगा क्योंकि दूसरी तरफ आरजेडी का महागठबंधन भी खराब हालत में नहीं है. यदि मुस्लिम और यादव जातियों के वोट जोड़ दें तो 30 फीसदी वोट पर वो बैठे हुए हैं. कांग्रेस के पास 5 फीसदी वोट है, साथ में मांझी भी हैं.
टिप्पणियां बिहार में दो प्रमुख दलित जातियां हैं जिसमें एक का प्रतिनिधित्व पासवान करते हैं और दूसरे का मांझी. और दोनों जातियों की आपस में बनती नहीं है. इसलिए दोनों जातियां अलग-अलग गठबंधन में हैं. यही वजह है महागठबंधन भी अच्छी टक्कर देने की स्थिति में है. 2019 के लिहाज से एनडीए के लिए बिहार काफी महत्वपूर्ण राज्य है जहां की 40 सीटें काफी मायने रखती हैं. क्योंकि बीजेपी को भी पता है कि वह 2019 में राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में 2014 जैसा प्रर्दशन दुहराने की हालत में शायद नहीं होगी. ऐसे में बिहार, ओडिशा, केरल और बंगाल जैसे राज्यों का महत्व काफी बढ़ जाता है. यही वजह है बीजेपी बिहार में फूंक फूंक कर कदम रख रही है और नीतिश कुमार को आगे किए हुए है जिसकी उम्मीद बिहार बीजेपी के कई नेताओं को भी नहीं थी. इसलिए आने वाले वक्त में बिहार में गठबंधन को लेकर और भी दांवपेंच खेले जाने बाकी है.
मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर – पॉलिटिकल न्यूज़' हैं…
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