देश को दहलाने की साजिश रच रहे थे ये 10 शातिर, इंजीनियरिंग छात्र से लेकर वेल्डर तक को दी गई थी जिम्मेदारी, जानें पूरी डिटेल

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

एनआईए ने बुधवार को आतंकी संगठन आईएसआईएस के मॉड्यूल 'हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम' के एक सरगना समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया. बताया जा रहा है कि ये लोग राजनीतिक हस्तियों व भीड़ भाड़ वाले इलाकों पर हमले की साजिश कर रहे थे. एनआईए की टीम ने 17 जगहों पर छापेमारी कर जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. उनमें साजिश का मास्टरमाइंड मुफ्ती सुहैल है. जोकि मुख्यरूप से अमरोहा का रहने वाला है.

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एनआईए के अनुसार सुहैल दिल्ली में रहकर देश को दहलाने की तैयारी कर रहा था. इस साजिश को मूर्त रूप देने के लिए सुहैल ने अमरोहा को आतंक का अड्डा बनाया. और इसी जगह को मौत का सारा सामान रखने के लिए चुना. साजिश का माइस्टरमाइंड सुहैल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा का मूल निवासी है जहां वह हकीम महताबउद्दीन हाशमी रोड पर एक मदरसे में मुफ्ती का काम करता है. मुफ्ती ने तीन-चार महीने पहले ही इस ग्रुप को बनाया था और आईएसआईएस से जुड़े ऑन-लाइन संसाधनों का उपयोग करके अपने सदस्यों को उकसाया करता था. एजेंसी द्वारा एक वीडियो जब्त किया गया है जिसमें सुहैल को यह कहते सुना जा सकता है कि सर्किट का उपयोग कर कैसे बम तैयार किया जा सकता है.आरोप है कि सुहैल ने टीम के अन्य सदस्यों को हथियार, विस्फोटक और दूसरे जरूरी सामान खरीदने का जिम्मा सौंपा था ताकि रिमोट से नियंत्रित बम और पाइप-बम तैयार किया जा सके.

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इसके अलावा ग्रुप में अनस यूनुस की भी अहम भूमिका रही. वह जाफराबाद का रहने वाला है और नोएडा के एक निजी विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग का छात्र है. उसने आतंकी साजिश के तहत बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे बिजली के उपकरण, अलार्म घड़ियां, बैटरी आदि की खरीद की. 23 साल का राशिद जफर भी इस साजिश में शामिल रहा जोकि जाफराबाद का रहने वाला है और कपड़ों का कारोबार करता है.

अमरोहा के सैदापुर इम्मा में रहने वाला 28 साल का सईद भी गिरफ्त में है जोकि एक वेल्डिंग की दुकान चलाता है जहां उसने कुछ पिस्तौल और रॉकेट लॉन्चर तैयार किए थे. सईद का भाई रईस भी इस साजिश का हिस्सा रहा जिसने आईईडी और पाइप बम तैयार करने के लिए 25 किलो विस्फोटक सामग्री खरीदी थी. बताया जा रहा है कि उसने आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए एक रॉकेट लॉन्चर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

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इसके अलावा 20 साल जुबैर मलिक जोकि दिल्ली में बीए फाइनल इयर का स्टूडेंट और उसका भाई जैद भी साजिश में शामिल रहे. दोनों ने फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड (135 बरामद), बैटरी, कनेक्टर और बम बनाने की सामग्री खरीदी. इन्हीं दोनों ने फंड की व्यवस्था के इरादे से अपने घर से 5 लाख रुपये सोना चुराया था. एनआईए के अधिकारी तब हैरान रह गए जब वो साकिब इफ्तेकार तक पहुंचे, हापुड़ निवासी साकिब जामा मस्जिद, बक्सर, उत्तर प्रदेश में इमाम का काम करता है. उसने हथियारों की खरीद में मोहम्मद सुहैल की मदद की थी. एजेंसी को तलाशी के दौरान उसके पास से 12 पिस्तौलें, 150 कारतूस, चाकू और तलवारें बरामद हुईं.

इसके अलावा 25 से 30 साल के बीच मोहम्मद इरशाद ऑटो रिक्शा चालक और मोहम्मद आजम दिल्ली के सीलमपुर में दवाइयों की दुकान चलाता है. वह सुहैल के लिए हथियारों का इंतजाम करता है.

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