दूसरी बार उद्योगपतियों के पक्ष में खड़े दिखे पीएम मोदी, बोले- उद्योग, व्यापार की आलोचना की संस्कृति से सहमत नहीं

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पीएम मोदी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के उद्योग जगत के पक्ष में एक बार फिर से अपना मजबूत समर्थन दर्शाते हुए बुधवार को कहा कि उद्योग व्यापार की आलोचना करने की संस्कृति में उनका विश्वास नहीं है. पीएम मोदी ने कहा, उनका मानना है कि उद्योग जगत अपना कारोबार के साथ-साथ उल्लेखनीय सामाजिक कार्य भी कर रहा है. उन्होंने यह भी इच्छा जतायी कि देश के नागरिक न केवल ईमानदारी से कर अदा करें बल्कि सामाजिक बदलाव के लिये भी अपनी तरफ से थोड़ा योगदान करें. प्रधानमंत्री ने आईटी पेशेवरों एवं विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को टाउनहॉल संबोधन में कहा, ‘हमारे देश में कारोबारियों, उद्योगपतियों को गाली देना सामान्य बात है. मुझे नहीं पता कि इसका कारण क्या है लेकिन यह एक फैशन बन गया. मैं इस प्रकार की सोच से सहमत नहीं हूं.'
उन्होंने आईटी पेशेवरों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों से सामाजिक बदलाव लाने के लिये अपनी विशेषज्ञता और श्रम शक्ति का योगदान देने को कहा.' उन्होंने कहा, ‘हमने आज टाउनहाल के कार्यक्रम में देखा कि कैसे अग्रणी कंपनियां शानदार सामाजिक कार्य कर रही हैं….' यह दूसरा मौका है जब पीएम मोदी भारतीय उद्योगपतियों के पक्ष में मुस्तैदी से खड़े हुए. इससे पहले, जुलाई में मोदी ने कहा था कि वह उद्योगपतियों के साथ खड़े होने से नहीं डरते क्योंकि वह यह मानते हैं कि उनका भी देश के विकास में उतना ही योगदान है जितना कि दूसरों का.
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार में अधिक लोग कर दे रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि उनके धन का उपयोग समुचित तरीके से हो रहा है. उन्होंने कर से आगे बढ़कर भी समाज के लिये कुछ देने की व्यवस्था की वकालत की जिसमें नागरिक ईमानदारी से कर देने के साथ ही थोड़ा समाज के लिये भी योगदान दें. प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य प्रौद्योगिकी पर निर्भर है जिसका उपयोग दुनिया की तीव्र वृद्धि वाली अर्थव्यवस्था के समक्ष मसलों के समाधान के विकास में किया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में हाल की तेजी से देश में खुदरा ईंधन की कीमत बढ़ने को लेकर मची घबराहट के बीच मोदी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना इसका जवाब है और वह चाहते हैं कि घरेलू सामाजिक उद्यमी कम लागत वाला माडल विकसित करें जिसमें सस्ती और आसानी से चार्ज होने वाली बैटरी हो. कार्यक्रम में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, काग्नीजेंट, टेक महिंद्रा और माइंडट्री जैसी कंपनियों ने उनके और उनके कर्मचारियों द्वारा समाज के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी.
उन्होंने हाल में पेश ‘सेल्फ 4 सोसाइटी' के समर्थन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी दिखायी. नया पोर्टल ‘सेल्फ4 सोसाइटी डाट माइजीओवी डाट इन' का नाम ‘मैं नहीं हम' रखा गया है. यह कंपनियों के लिये एक मंच के रूप में काम करेगा जो वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेश, स्वच्छ भारत जैसे सामाजिक कार्यों के लिये अपनी प्रौद्योगिकी, कौशल और मानव संसाधन का योगदान कर सकेंगे. प्लेटफार्म पर 85 आईटी कंपनियां पहले ही अपना पंजीकरण करा चुकी हैं. इन कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या दो करोड़ है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में करदाताओं का आधार बढ़ा है. इसका कारण दंडात्मक कार्रवाई का डर नहीं बल्कि करदाताओं का भरोसा है कि उनका धन समुचित रूप से और लोगों के कल्याण के लिये उपयोग हो रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘कर देना प्रकृति है और कर नहीं देना विकृति है. लेकिन कर के अलावा कुछ और देना संस्कृति है.''प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं ईमानदार करदाताओं की सराहना करता हूं जिनकी संख्या बढ़ी है. सामाजिक सेवा कर के अलावा कुछ और देना है. हमें इस संस्कृति की जरूरत है.'
पीएम मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्वैच्छिक प्रयासों से कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव आ सकता है. उन्होंने कहा कि युवाओं को किसानों के कल्याण के लिये कार्य करने चाहिए. उन्होंने कड़ी मेहनत करने वाले किसानों से बूंद सिंचाई अपनाने को कहा. प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, ‘जब जल की खपत की बात आती है, हम लापरवाह होते हैं. हमें न केवल जल का संरक्षण करने की जरूरत है बल्कि उसके पुन:चक्रण की भी जरूरत है.'
टिप्पणियां प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दुनिया भी अब हिन्दुस्तान को इंतजार करते हुए नहीं देखना चाहती, हिन्दुस्तान दुनिया की अगुवाई करे, इस अपेक्षा के साथ देख रही है. हमें दुनिया की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है.'' स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में एक पेशेवर के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि स्वच्छ भारत अभियान के प्रतीक से जुड़ा चश्मा भी महात्मा गांधी का है जो स्वच्छ भारत के लिये प्रेरणा हैं. ‘‘हम बापू के सपने को पूरा कर रहे हैं.'' पीएम मोदी ने कहा, ‘‘कुछ काम सरकार नहीं कर सकती और जो काम सरकार नहीं कर सकती, वह संस्कार कर सकती है. स्वच्छता का विषय संस्कार से जुड़ा है. ऐसे में सरकार एवं संस्कार मिल जाएं तो चमत्कार हो सकता है.'' उन्होंने नागरिकों और प्रौद्योगिकी से जुड़े लोगों से सोचने को कहा कि वे कैसे सामाजिक कार्यों के जरिये समाज को आगे बढ़ा सकते हैं.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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