दिल्ली : हाईप्रोफाइल टैटू गर्ल की हत्या का केस बंद, आठ साल से फरार आरोपी की मौत

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आरोपी राजू गहलोत और टैटू गर्ल नीतू सोलंकी (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

दिल्ली के हाइप्रोफाइल टैटू गर्ल की हत्या के फरार आरोपी 37 साल के राजू गहलोत ने आठ साल में पहली बार मंगलवार को अपनी मां को कॉल किया. बोला कि मैं बीमार हूं, अब जिंदा नहीं बचूंगा. वह गुरुग्राम के पारस अस्पताल में भर्ती था. पुलिस ने उसके घरवालों के मोबाइल नम्बर सर्विलांस पर लगा रखे थे. पुलिस ने जैसे ही मोबाइल फोन पर बातचीत सुनी, उसकी टीम फौरन गुरुग्राम गई, लेकिन राजू गहलोत जिंदा नहीं मिला. उसे लीवर की बीमारी थी जिसके चलते उसकी अस्पताल में मौत हो गई.

हत्या का यह हाइप्रोफाइल मामला 11 फरवरी 2011 का है जब नई दिल्ली स्टेशन पर एक बैग के अंदर एक लड़की का कई टुकड़ों में कटा हुआ शव मिला. उसके पेट पर मोर जैसा टैटू बना हुआ था, जिसे देखकर लड़की के घरवालों ने उसकी पहचान 28 साल की नीतू सोलंकी के रूप में की. नीतू आईबीएम जैसे बड़े कॉल सेंटर में काम कर चुकी थी. उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ किया था और निगम पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकी थी. वह 2010 में घर में यह बताकर निकली कि वह सिंगापुर जा रही है, लेकिन फिर घर नहीं लौटी.

घर से जाने के बाद वह 29 साल के राजू गहलोत के साथ लिव इन में रहने लगी. राजू एयर इंडिया में केबिन क्रू था लेकिन 2010 से उसने काम पर जाना बंद कर दिया था. राजू और नीतू हरि नगर और आश्रम में अलग-अलग मकानों में किराए पर रहे. उसने हरि नगर में अपना एक सुरेंद्र पाल सिंह के नाम का फ़र्ज़ी पहचान पत्र भी बनवाया. इस दौरान नीतू अपने घरवालों से इंटरनेट कालिंग या वेबकेम के जरिए बात करती थी. हत्या के एक दिन पहले भी उसने अपनी बहन को बताया कि उसके सर में चोट लगी है.

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पुलिस ने हत्या के इस केस में पहली गिरफ्तारी 2 मार्च 2011 को की. राजू गहलोत के चचेरे भाई नवीन शौकीन को गिरफ्तार किया गया. नवीन ने बताया कि राजू और नीतू का अक्सर झगड़ा होता था. 11 फरवरी को उसने गुस्से में आकर आश्रम वाले घर में नीतू की हत्या कर दी. फिर शव के कई टुकड़े किए. उसके बाद नवीन को कार लेकर बुलाया और शव को नई दिल्ली स्टेशन पर फेंककर चला गया.

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हत्या के बाद क्राइम ब्रांच की टीमें छह महीने तक उसकी तलाश में लगातार छापेमारी करती रहीं, लेकिन राजू मुंबई, गोवा और दूसरे शहरों में भागता रहा. उसने इस दौरान 20 से ज्यादा मोबाइल प्रयोग किए. वह एक मोबाइल एक बार मे प्रयोग कर किसी दूसरे को बेच देता था. पुलिस ने उसकी तलाश में 150 से ज्यादा बार छापेमारी की. कई कॉल सेंटरों में भी उसकी तलाश की लेकिन राजू गहलोत का सुराग नहीं लग सका.

मीडिया में इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड की कवरेज और वांटेड राजू का फोटो लगातार चल रहा था, इस वजह से उसने अपना हुलिया भी बदला.

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उसकी मौत के बाद जांच में पता चला कि वह कई शहरों की खाक छानने के बाद गुरुग्राम आ गया यहां उसने अपना नाम बदलकर रोहन दहिया रख लिया और अपने सभी दस्तावेज भी उसी नाम से बनवा लिए. इन्हीं दस्तावेजों के जरिए उसने एक बड़ी कंपनी कोचर ऑटोमोबाइल्स में नौकरी हासिल कर ली. वह पिछले आठ साल से कंपनी में रिपोर्टिंग ऑफिसर के पद पर था. इस दौरान कंपनी में किसी को उस पर शक नहीं हुआ.

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि पिछले आठ सालों में राजू गहलोत ने कभी अपने घर वालों को फोन नहीं किया, इसलिए वह पकड़ में नहीं आ सका.मंगलवार को जब उसने मौत से पहले आखिरी बार मां को फोन किया तब पुलिस उस तक पहुंची, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले उसकी मौत हो चुकी थी. नीतू सोलंकी दिल्ली के नबादा और राजू गहलोत मटियाला इलाके का रहने वाला था.

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