जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की वर्कशॉप में प्रोफेसर ने बताया- क्यों देश के लिए जरूरी है सोलर एनर्जी

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में वर्कशॉप का आयोजन हुआ.

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग ने ‘‘स्टैंडर्ड ऑफ ग्रिड कनेक्टेड सोलर इन्वर्टर्स फॉर इंडियन पावर सिस्टम ‘‘ पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया. यह वर्कशॉप विभाग की एडवांस पावर इलेक्ट्रानिक्स रिसर्च लैब में हुई. इस वर्कशॉप में शिरकत करने वालों में नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के इंजीनियर्स मुख्य रूप से शामिल हुए जो विश्वविद्यालय से एडवांस सोलर प्रोफैशनल स्किल डेवलप्मेंट सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे हैं.
टिप्पणियां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डा एहतेशाम हक़ ने आईईसी स्टैंडडर्स फॉर इंडियन पावर सिस्टम के बारे में विस्तार से जानकारी मुहैया कराई. विभाग में एडवांस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैब उन्हीं ने स्थापित की है और वह इसके प्रभारी भी हैं. उन्होंने लैब में सोलर इन्वटर्स के परीक्षण और उसे मापने का लाइव प्रदर्शन किया. वर्कशॉप में हिस्सा लेने आए इंजीनियर्स ने जेएमआई परिसर में लगे सोलर पावर प्लांट का अध्ययन किया.
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर ज़ेड ए जाफ़री ने वर्कशॉप में हिस्सेदारी करने वालों का स्वागत किया और सोलर एनर्जी देश के लिए क्यों अत्याधिक ज़रूरी है, इसके बारे में विस्तार से बताया. एनआईएसई की समन्वयक स्वाति अगारिया ने डॉ. हक़ से मिल कर वर्कशॉप का आयोजन किया. जेएमआई के रजिस्ट्ररार ए पी सिद्दीकी ने इस वर्कशाप को कामयाब बनाने में योगदान दिया.जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अक्षय ऊर्जा की पहल को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण के नए आयाम स्थापित किए हैं. इसने 2.2 मेगावॉट का सोलर प्लांट स्थापित किया है जिसने आंशिक तौर पर काम करना शुरू भी कर दिया है. यह देश के किसी भी विश्वविद्यालय में स्थापित किए जाने वाला सबसे बड़ा रूफ़टॉप सोलर पावर प्लांट है. जेएमआई सोलर एनर्जी पर एक वोकेशनल डिग्री कोर्स भी चला रहा है. वह इस क्षेत्र में कुछ नए कोर्स शुरू करने पर भी विचार कर रहा है.
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