जम्मू-कश्मीर में बढ़े स्नाइपर हमले, बीते 7 दिनों में 3 जवान शहीद, VIPs को सबसे ज्यादा खतरा

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में इस सप्ताह जिस तरह से स्नाइपर हमले (गुप्त तरीके से किए जाने आतंकी हमला) में दो सेना के जवान और एक पारामिलिट्री के जवाने की मौत की मौत हुई है, उसने अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी परेशानी बढ़ा दी है. बीते दिनों हुए स्नाइपर अटैक के बाद अब सुरक्षाबलों और उनकी खुफिया एजेंसियों को यह संदेह है कि घाटी में कुछ हाई स्किल्ड टेररिस्ट स्नाइपर्स एक्टिव हो गये हैं. सूत्रों का कहना है कि स्नाइपर्स आतंकी इतने खतरनाक होते हैं कि बिना नजरों में आए एक ही जगह पर वह काफी समय तक छुपे रह सकते हैं और किसी को मारने के बाद वहीं वापस जा सकते हैं और यह बात घाटी में वीआईपी लोगों के लिए बहुत ही खतरे वाली बात हो सकती है.
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शनिवार को श्रीनगर के बाहरी इलाके में ऐसे ही स्नाइपर्स हमले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अधिकारी राजेंद्र प्रसाद शहीद हो गये थे. शुक्रवार-शनिवार की मध्यरात्रि में नौगाम क्षेत्र के ग्रिड स्टेशन वागुरा में आतंकवादियों द्वारा की गई फायरिंग में सहायक सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र प्रसाद गोली लगने से शहीद हो गये. इस घटना को सुरक्षाबलों ने स्नाइपर की तरह का हमला बताया.
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इसके अलावा, 22 अक्टूबर को एक अन्य संदिग्ध स्नाइपर हमले में एक अर्धसैनिक सैनिक की मौत हो गई थी, और तीन दिनों बाद एक सैनिक सैनिक को ट्रेल में एक लंबी दूरी के बंदूक हमले में मारा गया था.
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इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि आतंकवादी अंधेरे में खुद को छिपाने के लिए एडवांस्ड नाइट विजन ग्लास या एनवीजीसी का उपयोग करते होगे और दूरी से सुरक्षा बलों पर हमला कर सकते हैं. इस प्रकार का स्निपर हमला आंतकियों को वारदात को अंजाम देकर भागने में काफी मददगार साबित होते हैं. जब सुरक्षा बल हमले के सर्च ऑपरेशन शुरू करते हैं.
टिप्पणियां एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं कि इन हमलों में अमेरिकी एम6 हथियारों का इस्तेमाल हुआ है. रात में इस तरह के हमले करने के लिए आतंकी राइफल पर एनवीजीसी का इस्तेमाल करते हो सकते हैं.
सूत्रों का कहना है कि स्नाइपर के खतरे को देखते हुए आईजीपी ने पुलिस मुख्यालय को इस मसले की ओर ध्यान आकर्षित करना लिए पत्र लिखा है. हालांकि, वीवीआईपी पूरी तरह से सुरक्षा के घेरे में होते हैं और सुरक्षित हैं, मगर फिर भी स्नाइपर के खतरे को काउंटर करना एक चुनौती है.
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