घर आने के बाद नहीं होगी ऑफिस का फोन और मेल का जवाब देने की मजबूरी, लोकसभा में पेश हुआ बिल

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एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले.

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किया. जिसके तहत काम के बाद कर्मचारी कॉल्स को डिसकनेक्ट और मेल का जवाब देने की मजबूरी से छुटकारा पा सकेंगे. इस बिल में कर्मचारियों को यह अधिकार देने की बात की गई है. इस बिल को राइट टू डिसकनेक्ट (Right To Disconnect) नाम दिया गया है. सुप्रिया सुले ने कहा कि इस बिल के जरिए कंपनी कर्मचारियों पर ज्यादा काम नहीं लाद सकेगी. उन्होंने बताया कि इस बिल के आने के बाद कर्मचारियों में तनाव कम रहेगा और पर्सनल लाइफ स्टेबल रहेगी.

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इस बिल के तहत कल्याण प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. जहां आईटी, कम्यूनिकेशन और श्रम मंत्रियों को रखा जाएगा. इस बिल के तहत, एक चार्टर भी तैयार किया जाएगा. जैसे कंपनियो में 10 से ज्यादा कर्मचारी हैं तो वो अपने कर्मचारियों के साथ बात करें और वो जो चाहते हैं वो चार्टर में शामिल करें. जिसके बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी.

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बता दें, ऐसा ही बिल फ्रेंच सुप्रीम कोर्ट लागू कर चुकी है, न्यू यॉर्क में भी इसकी शुरुआत हुई और जर्मनी में इस बिल के शुरू होने की बात चल रही है. यानी अगर ये बिल पास हो गया तो कर्मचारी काम के बाद ऑफिस के कॉल्स काट सकेंगे और इस पर कोई एक्शन भी नहीं लिया जाएगा.

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बता दें कि सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों (General Category Reservation) और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण का बिल लोकसभा में पास हो गया. लगभग पांच घंटे की चर्चा के बाद ये बिल पास हुआ. लोकसभा में 323 वोट बिल के समर्थन में पड़े थे और विरोध में महज़ 3. वर्ष 1992 में तत्कालीन सरकार ने इन वर्गों के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन माननीय उच्चतम न्यायालय ने संविधान में व्यवस्था ना होने के कारण इसे निरस्त कर दिया था.

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