क्‍या जेल से रिहा होंगे संतोष सिंह, मनु शर्मा और सुशील शर्मा? सज़ा समीक्षा बोर्ड की बैठक आज

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दिल्ली में आज सज़ा समीक्षा बोर्ड की बैठक होगी

नई दिल्ली: दिल्ली में आज कैदियों की सज़ा पर समीक्षा करने वाले बोर्ड की बैठक होगी. इस बैठक में इस मुद्दे पर बात होगी कि सज़ा काट रहे हाई प्रोफ़ाइल संतोष सिंह, मनु शर्मा और सुशील शर्मा को जेल से रिहा किया जाए या नहीं? संतोष सिंह को 1996 में प्रियदर्शनी मट्टू से रेप और मर्डर के केस में सज़ा दी गई थी. मनु शर्मा ने 1999 में मॉडल जेसिका लाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या की थी, जिसे बाद में 'तंदूर कांड' कहा गया.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संतोष सिंह का नाम उन कैदियों की सूची में बाद में डाला गया है जिन्हें समय से पहले छोड़ने की बात है. जेल के अधिकारियों के मुताबिक, उसने 14 सालों में कोई नियम नहीं तोड़ा है और उसका रिकॉर्ड अच्छा है. सज़ा की समीक्षा करने वाले बोर्ड में दिल्ली सरकार के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन, डीजी जेल, गृहसचिव, लॉ सेक्रेटरी, ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (क्राइम), डिस्ट्रिक जज और सरकार की तरफ़ से नियुक्त किए गए चीफ़ प्रोबेशन ऑफ़िसर शामिल होते हैं.
प्रियदर्शनी मट्टू से रेप और मर्डर के केस
आईपीएस अधिकारी जेपी सिंह के बेटे संतोष सिंह ने वर्ष 1996 में थर्ड ईयर की लॉ स्‍टूडेंट प्रियदर्शनी मट्टू का रेप करने के बाद हत्‍या कर दी थी. इस मामले में संतोष सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया लेकिन 1999 में दिल्‍ली की निचली अदालत ने आरोपी को साक्ष्‍यों के अभाव में बरी कर दिया. इसके बाद दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए साल 2006 में संतोष सिंह को फांसी की सजा सुनाई. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संतोष सिंह की सजा को मृत्‍युदंड से बदलकर उम्रकैद कर दिया. आपको बता दें कि इस मामले में संतोष सिंह वर्ष 2006 से जेल में बंद है.
टिप्पणियांजेसिका लाल मर्डर केस
दक्षिणी दिल्ली में अप्रैल 1999 को एक रेस्‍टोरेंट में मशहूर मॉडल जेसिका लाल की हत्‍या कर दी गई. इस मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को गिरफ्तार किया गया. निचली अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए जिसके बाद फरवरी 2006 में अदालत ने 12 में से नौ आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. इस मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की और दिसंबर 2006 को मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके बाद 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.
नैना साहनी मर्डर केस
नैना साहनी की 2 जुलाई 1995 को हत्या कर दी गई थी. हत्या के बाद उसके शव को कई टुकड़े किए गए और एक तंदूर में जला दिए गए. उसी दौरान पैट्रोल ड्यूटी पर लगे दिल्ली पुलिस के जवानों को तंदूर से धुआं उठता दिखा और बदबू से कुछ शक हुआ. तंदूर को देखा गया तो उसमें शव के टुकड़े थे. इसके बाद सुशील शर्मा मौके पर फरार हो गया और बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया. ट्रायल कोर्ट ने 2003 में सुशील शर्मा को दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई. इस मामले में नैना की गोली मारकर हत्या करने और उसके शव को ठिकाने लगाने की साजिश में सुशील शर्मा दोषी साबित हुए थे. बताया गया कि सुशील को शक था कि पार्टी के एक अन्य वर्कर से उसकी बीवी नैना के संबंध हैं. इस हत्या के लिए मौत की सजा पाए सुशील शर्मा की सजा को हाईकोर्ट ने भी सही माना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में फांसी की सजा से राहत देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या संबंधों में कड़वाहट के चलते की गई और इससे समाज के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं होता.
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