कोरोना का पता नहीं, लेकिन खाना न मिला, तो भूख से मर जाएंगे : लॉकडाउन में किल्लत झेल रहे मजदूर

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लॉकडाउन में किल्लत झेल रहे मजदूर

नई दिल्ली:

दिल्ली-NCR समेत पूरे भारत देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलते संक्रमण से एक ओर सैकड़ों लोग बीमार और कुछ लोगो की मौते भी हो रही है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है. लेकिन इसके रोकथाम के दौरान दूसरी ओर बेरोजगार मजदूर तबके को किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिलने के कारण अब राजधानी दिल्ली में भूख से एक ही जगह पर लगभग 150 से ज्यादा मजदूर परिवार और उनके बच्चे भूख से परेशान हैं जिसे देखने वाला कोई नहीं.

साउथ दिल्ली के छत्तरपुर स्थित फतेहपुर बेरी के चंदन होला इलाके में मजदूरों का घर है. घर के बाहर हाथ जोड़ खड़े ये महिला मजदूर, पुरुष मजदूर और उनके बच्चे हैं. इनकी माने तो ये सभी लोग पिछले 4 दिनों से कुछ भी नही खाया है. इनका कहना है ये सभी रोजाना कमाते थे और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे. बंदी के दौरान जो पैसे बचे थे, उससे एक-दो दिन तो किसी तरह गुजारा चला लिए लेकिन अब न घर में कुछ भी खाने को है और न ही पैसे.

इनका कोई राशन कार्ड नहीं है. ये तो यूपी और बिहार से आकर रोजाना मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों के पेट को पाल रहे थे. दिल्ली में जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन से अब ये अपने गांव भी नहीं जा सकते हैं और न कोई काम कर सकते हैं. इन लोगों के पास पैसे भी नहीं है कि खाने का सामान खरीद सके.

@ArvindKejriwal
दिल्ली के फतेहपुर बेरी के चंदन होला इलाके में मजदूरों के परिवार के करीब 150 लोग एक साथ रह रहे हैं,साथ रहने से इन्हें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा है,फिलहाल उन्हें लिए सबसे बड़ा खतरा भूख है,सभी हाथ जोड़कर कह रहे हैं उन्हें खाना दो!#lockdownindiapic.twitter.com/Fo0JVb3RmA

— Mukesh singh sengar मुकेश सिंह सेंगर (@mukeshmukeshs) March 26, 2020

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एक बच्चे द्वारा रोते हुए ये कहना कि मैं 4 दिनों से भूखा हूं मुझे खाने के लिए कुछ भी नहीं मिल रहा है. पिताजी मार्केट में जाते हैं तो पुलिस वाले उनको मारकर भगा देते हैं. नौकरीपेशा वाले को तो उनकी सैलरी उनके एकाउंट में पहुंच जायेगी पर वो लोग जो रोज कमाते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण करतें है उनका क्या. कुछ मजदूर हैं जिनके पास राशनकार्ड है तो उन्हें तो राशन मिल जाएगी लेकिन वो मजदूर जिनके पास कोई राशनकार्ड नहीं है वो क्या खायेंगे, इसपर सरकार ने कुछ भी नहीं किया. यहां के स्थानीय पार्षद, विधायक और सांसद के द्वारा अभी तक कोई मदद नहीं मिली है ये लोग संक्रमण से बाद में मरेंगे पहले भूख से मर जायेगे.

आज दिल्ली में 7वां दिन हो गया आज तक इन लोगों के पास नहीं तो कोई सरकारी कर्मचारी न ही किसी एनजीओ ने संपर्क किया. ये सभीलोग हाथ जोड़कर मीडिया के सामने विनती कर रहे हैं कि सर आप ही कुछ कीजिए.

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