केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के नाम खुला खत…

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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (फाइल फोटो)

प्रिय प्रकाश जी
उम्मीद करता हूं कि आप अच्छे होंगे. जब आप प्रवक्ता थे तब आपसे महीने में 10-12 बार बात हो जाती थी. तब मैं आपसे अपने चैनल में डिस्कशन शो में भाग लेने के लिए बात करता रहता था. आप का दो शब्द 'विषय' और 'समय' मुझे हमेशा याद रहेगा. फ़ोन उठाते ही आप सबसे पहले शो का समय पूछते थे फिर किस विषय पर बहस है पूछते थे, इसके बाद आप जवाब हां या न में देते थे. मंत्री बनने के बाद आजकल आप बहुत कम शो में भाग लेते हैं. मैं मानता हूं यह बहुत अच्छी बात है क्योंकि आजकल बहस का स्तर बहुत गिर गया है. प्रवक्‍ताओं के पास कोई मुद्दा नहीं है. ज्यादा से ज्यादा समय टीवी चैनल पर ऐसे विषयों पर बहस होती है जो न समाज के लिए ठीक है न लोकतंत्र के लिए. ऐसे भी आप तो खुद समझते हैं क्योंकि आप खुद पत्रकार रह चुके हैं.
अब असली मुद्दे पर आते हैं. प्रकाश जी, 6 दिसंबर को दिल्ली के EPFO ऑफिस के सामने बुजुर्गों का प्रदर्शन कवर करने गया था. इस प्रदर्शन में 60 से लेकर 90 साल तक बुजुर्ग शामिल हुए थे. सर्दी के मौसम में जहां इन बुजुर्गों को घर मे रहना चाहिए था वो सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रकाश जी, यह वो बुजुर्ग हैं जो असंगठित खेत्र से 30-30 साल काम करके रिटायर हो चुके हैं. आपके राज्य महाराष्ट्र से ज्यादा से ज्यादा लोग आए थे. महाराष्ट्र के नांदेड़ ज़िले के 80 साल की बुजुर्ग महिला राजबाई को ठंड में प्रदर्शन करते हुए देख कर मेरा खुद का कलेजा ठंडा हो गया.
राजबाई ने बताया कि उनके पति किसी असंगठित क्षेत्र में काम करते थे. तीन साल पहले उनकी मौत हो गई. पेंशन के रूप में राजबाई को सिर्फ 300 रुपये मिलते हैं. 80 साल की उम्र में भी राजबाई दूसरों के खेत में काम करके गुजारा कर रही हैं.
प्रकाश जी, कई ऐसी और महिलाएं थीं जो अपने संघर्ष की कहानी बताते बताते रो पड़ीं. महाराष्ट्र से आई कई ऐसी महिलाएं मिलीं जो 20-20 साल तक काम कर चुकी हैं और रिटायर होने के बाद पेंशन के रूप में किसी को 700 रुपये मिल रहे हैं तो किसी को 1000 रुपये. यह सभी महिलाएं दूसरों के खेतों में मजदूरी करने जाती हैं. आपको पता है आजकल 1000 रुपये की कोई कीमत नहीं है. प्रकाश जी, महाराष्ट्र के बीड जिले से आए चतुर्भुज देशमुख से भी मुलाकात हुई. देशमुख महाराष्ट्र के राज्य परिवहन में ड्राइवर थे. ड्यूटी के दौरान उनका एक पैर दुर्घटना में कट गया. मुआवजे के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिला. मुआवजे के लिए वो कोर्ट में केस लड़ रहे हैं. पेंशन के रूप में उन्हें 1368 रुपये मिल रहे हैं जिसमें परिवार चलाना मुश्किल है. ऐसे कई बुजुर्ग मुझे मिले जिनकी कहानी सुनकर मैं भावुक हो गया. प्रकाश जी, आप मेरी जगह होते तो शायद ज्यादा भावुक हो जाते.
प्रकाश जी, आपको लगता होगा यह बात मैं क्यों बता रहा हूं. दरअसल बात यह है कि अनशन पर बैठे एक बुजर्ग ने मुझे एक खत दिखाया और यह खत आपने 2012 में राज्यसभा को लिखा थे. इस खत में आपने लिखा था EPS 95 पेंशन के तहत न्यूनतम पेंशन 3000 होना चाहिए. मुझे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि मैं आप को जनता हूं. आप एक सुलझे हुए नेता हैं और लोगों की समस्या को समझते हैं. जैसे ही मैं घर पहुंचा मेरे व्हाट्सऐप पर एक वीडियो आया. यह वीडियो आपकी प्रेस कांफ्रेंस का था. 2014 में एक खास प्रेस कांफ्रेंस करके आपने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी यह मांग करती है कि EPS 95 पेंशन के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 से बढ़ाकर 3000 होनी चाहिए थी और आपने यह भी कहा था कि 1000 की पेंशन मजदूरों के साथ धोखा है. आपने उस वक्त UPA सरकार की काफी आलोचना की थी. आप ने यह भी कहा था कि सरकार को भी मालिक की तरह 8.33 प्रतिशत कर्मचारियों के खाते में जमा करना चाहिए और अगर ऐसा होगा तो 3000 की पेंशन देना कोई मुश्किल नहीं होगा. आपने इस प्रेस वार्ता में बहुत कुछ कहा था. हो सकता है आप भूल गये होंगे. यहां पर वीडियो भी साझा कर रहा हूं. एक बार खुद का पुराना प्रेस कांफ्रेंस देख लीजिए.

प्रकाश जी, चार साल से आपकी सरकार है लेकिन आज भी EPS 95 पेंशन के तहत न्यूनतम पेंशन एक हज़ार रुपये है. EPS 95 पेंशन के अंदर आने वाले रिटायर्ड कर्मचारी उम्मीद कर रहे थे कि आपकी सरकार आने की बाद पेंशन बढ़कर कम से कम 3000 हो जाएगी लेकिन आपने कुछ नहीं किया. मुझे बहुत बुरा लग रहा है. मैं विश्वास भी नहीं कर पा रहा हूं कि समय के साथ आप बदल जाएंगे. अभी भी समय है प्रकाश जी, सरकार से बात कीजिये, जहां करना है कीजिये लेकिन इन बुजुर्गों की पेंशन बढ़ा दीजिये. राजबाई, आशा शिंदे, चतुर्भुज देशमुख जैसे बुजुर्गों के बारे में एक बार सोचिए. तीन दिन तक प्रदर्शन करने के बाद यह बुजुर्ग अपना प्रदर्शन खत्म कर चुके हैं क्योंकि श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि बहुत जल्दी वो प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजने वाले हैं. आप भी गंगवार जी से बात कीजिये, वित्तमंत्री से बात कीजिये. जल्द से जल्द इनकी पेंशन बढ़ा दीजिये. इन लोगों के पास आपको देने के लिए कुछ नहीं है लेकिन अगर आप पेंशन बढ़ा देते हैं तो आशीर्वाद ज़रूर देंगे. सोचा मंत्री बनने के बाद आप बहुत व्यस्त होंगे, पुरानी बात भूल गए होंगे इसलिए याद दिला दिया और उम्मीद करता हूं पेंशन को लेकर आप कर्रवाई ज़रूर करेंगे.
आप का शुभचिंतक
सुशील महापात्रा

टिप्पणियांसुशील मोहपात्रा NDTV इंडिया में Chief Programme Coordinator & Head-Guest Relations हैं
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