करतारपुर कॉरिडोर की आधारशीला रखेंगे इमरान, भारत ने भेजे दो मंत्री, सिद्धू पहले से मौजूद, 10 बातें

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करतारपुर कॉरिडोर: केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान देश के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गलियारे की आधारशिला रखेंगे. माना जाता है कि करतारपुर में ही सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अंतिम सांस ली थी. करतारपुर साहिब पाकिस्तान में रावी नदी के पार स्थित है और डेरा बाबा नानक से करीब चार किलोमीटर दूर है. सिख गुरु ने 1522 में इस गुरुद्वारे की स्थापना की थी. करतारपुर गलियारे से भारतीय सिख श्रद्धालु करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब तक वीजा रहित यात्रा कर सकेंगे. इस गलियारे के छह महीने के भीतर बनकर तैयार होने की उम्मीद है. मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद फैसल ने करतारपुर के लिए रवाना होने से पहले बुधवार को इस्लामाबाद में मीडिया को कहा कि करतारपुर सीमा का खुलना अल्पसंख्यकों के कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.
  2. फैसल ने कहा, ‘यह दिखाता है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों का खयाल रखता है.' उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष नवंबर में गुरु नानक देव की 550 जयंती से पहले गलियारे का निर्माण पूरा हो जाएगा.
  3. भारत की ओर गलियारे के लिए सोमवार को उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आधारशिला रखी थी.
  4. पाकिस्तान में होने वाले समारोह के लिए नवजोत सिंह सिद्धू मंगलवार को ही यहां पहुंच चुके हैं. नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान जाने के फैसले की आलोचनाओं के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने सहयोगी से इस पर दोबारा करने को कहा है. साथ ही सिंह ने कहा कि उन्होंने अनुमति के लिए सिद्धू का अनुरोध इसलिए स्वीकार कर लिया क्योंकि वह किसी को ‘निजी यात्रा' करने से मना नहीं कर सकते हैं।
  5. मुख्यमंत्री ने कहा कि सिद्धू मध्यप्रदेश में चुनाव प्रचार कर रहे थे, उसी दौरान उनसे फैसले पर पुन:विचार करने का अनुरोध किया. अमरिन्दर ने कहा, ‘सिद्धू ने मुझे बताया कि वह पहले ही जाने का वादा कर चुके हैं. जब मैंने उन्हें इस मुद्दे पर अपने रूख से अवगत कराया तो उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत यात्रा है, लेकिन वह मुझसे बात करेंगे. लेकिन अभी तक मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है.'
  6. भारत सरकार ने कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और हरदीप सिंह पुरी को भेजा है. भारत ने इस गलियारे का प्रस्ताव पाकिस्तान को करीब बीस वर्ष पहले दिया था.
  7. भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि दि्वपक्षीय बातचीत और करतारपुर कॉरिडोर दोनों अलग-अलग हैं. भारत सरकार पिछले 20 साल से इस कॉरिडोर के बारे में पाकिस्तान से बातचीत कर रही है. पाकिस्तान ने पहली बार सकारात्मक जवाब दिया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दि्वपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी. हम हमेशा कहते आ रहे है कि आतंकी और बातचीत साथ नहीं चल सकतीं. पाकिस्तान को पहले आतंकी गतिविधियों को रोकने होगा, उसके बाद बातचीत शुरू होगी.'
  8. रावी नदी के किनारे स्थित सिखों के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल को भारत के सीमावर्ती गुरदासपुर जिले से जोड़ने वाले एक धार्मिक गलियारे से दोनों देशों के बीच ‘‘उम्मीद और शांति'' लाने की संभावना है. इस गलियारे की नींव रखे जाने की पूर्व संध्या पर सीमा के दोनों तरफ रहने वालों का यह मानना है.
  9. प्रधानमंत्री इमरान खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के वरिष्ठ राजनेता और कई आला अधिकारी लाहौर से करीब 120 किलोमीटर दूर नारोवाल में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. नारोवाल निवासी 60 वर्षीय पाकिस्तानी कारोबारी अब्बास खान ने कहा, ‘पिछले 70 सालों में हम काफी लड़े हैं. उन लड़ाइयों से कोई फायदा नहीं हुआ, न भारत को न ही पाकिस्तान को. अब समय है कि हम एक नया सफर शुरू करें और करतारपुर गलियारे में शांति लाने की संभावना है.'
  10. एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक लाहौर निवासी बिलाल मोहम्मद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रभावशाली नेता हैं और वह तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान अगर चाहें तो द्विपक्षीय रिश्तों में बदलाव ला सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘यह उम्मीद और शांति का गलियारा होगा. हमें दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के लिये भी ऐसे ही प्रयास शुरू करने चाहिए.'

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