आध्यात्म मंत्रालय : शिवराज ने कहा- मेरा नाम मिटाना चाहते हैं, मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने भी जताया ऐतराज

2
- Advertisement -

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो).

भोपाल:

मध्यप्रदेश में देश के इकलौते आनंद विभाग और धर्मस्व विभाग को मिलाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नया आध्यात्म मंत्रालय बना दिया है. इस बारे में गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है.

आध्यात्मिक विभाग राम वन गमन पथ में पड़ने वाले क्षेत्र के विकास, नर्मदा, क्षिप्रा, ताप्ती और मंदाकिनी नदियों के न्यास बनाने और पवित्र नदियों को जीवित इकाई मानने की दिशा में काम करेगा. कांग्रेस सरकार के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज का आनंद विभाग सिर्फ बीजेपी नेताओं को आनंद दे रहा था.

हालांकि इस कदम से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नाराज हैं. उनका कहना है कि कुछ लोग चाहते हैं शिवराज का नाम मिटाना. उधर ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने खत लिखकर पूछा है कि क्या नया मंत्रालय सिर्फ सनातन धर्म के पुजारियों को खुश करने के लिए खोला जा रहा है?
आध्यात्म मंत्रालय का काम होगा, पुजारियों की नियुक्ति, उनको हटाने की जिम्मेदारी, धर्मस्थानों से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों का रखरखाव, धार्मिक स्थलों पर लगने वाले मेलों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और व्यवस्था के सुझाव देना और धार्मिक संस्थाओं की जमीन का प्रबंधन.

- Advertisement -

टिप्पणियां

हालांकि हर कोई इस पहल से खुश नहीं है. खासकर मुस्लिम समुदाय ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के अध्यक्ष डॉ खुर्रम ने तो बाकायदा सरकार को खत लिखकर आध्यात्म मंत्रालय के औचित्य पर सवाल उठाया है. हालांकि सरकार का कहना है कि हर वर्ग का ध्यान रखा जाएगा. कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा मैं समझती हूं किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस पार्टी सबको साथ लेकर चलेगी क्योंकि ये देश और प्रदेश सबका है.

sjlaarug

वहीं बीजेपी कह रही है कि यह दुर्भावना है, गलत है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'वह विभाग चले ये मेरी प्रबल इच्छा है, नाम के लिए नाम बदलना ठीक नहीं. अब आनंद का नाम बदल दिया. अच्छा है तो चलने दो न दिक्कत क्या है, लेकिन ये दिक्कत है इस समय कि सब के सब बदल डालूंगा. अब सब बदल डालूंगा तो वंदेमातरम भी हो गया, आनंद भी हो गया. अब ये किसके कहने पर हो रहा है, मैं समझ नहीं पा रहा. हो सकता है कुछ लोगों ने सुझाया हो शिवराज नाम की चीज मिटा दो.'
चुनाव से पहले राहुल गांधी से लेकर कमलनाथ तक की मंदिर दौड़ पर बीजेपी ने कई सवाल उठाए थे. वैसे सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री मंदिर जा रहे हैं, ये कहकर कि धर्म किसी पार्टी की जागीर नहीं.

Source Article