अयोध्या : रामकथा में झूमतीं, नाचतीं और कभी आंसुओं के साथ भावविभोर हो रहीं गणिकाएं

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अयोध्या में मोरारी बापू रामकथा 'मानस गणिका' पर प्रवचन दे रहे हैं.

अयोध्या:

अयोध्या आते ही राम की जन्मस्थली याद आती है, सरयू का किनारा याद आता है पर इन दिनों अयोध्या में मोरारी बापू की कथा चर्चा में है क्योंकि बापू यहां मानस गणिका कर रहे हैं. देश के कई शहरों से गणिकाएं बापू की कथा सुनने यहां पहुंची हैं. ये कथा कई बार उन्हें काफी प्रभावित कर रही है तो कई बार उनके आंसू भी निकल पड़ रहे हैं.

मोरारी बापू के भजन पर नाचतीं यह महिलाएं वे हैं जिनके पास तथाकथित सभ्य समाज के लोग रात के अंधेरे में ही जाने की हिम्मत करते हैं. इन्हीं गणिकाओं को मोरारी बापू ने न सिर्फ दिन के उजाले में बुलाया है बल्कि राम की जन्म स्थली में अपनी राम कथा इन्हीं के लिए समर्पित भी की है. लिहाजा जो समाज इनके साथ नजरें मिलाने से डरता था वही समाज आज एक पंडाल में इनके साथ बैठकर कथा सुन रहा है. इस सम्मान से ये गणिकाएं भी बेहद खुश हैं. गणिका सोनी कहती हैं कि "बाबा के दरबार में जो भी कथाएं सुनी हैं गणिकाओं के ऊपर वो लाभदायक हैं और ये चाहते हैं कि उनके ऊपर जो कथा कही गई है वह सच्ची है.

हमेशा समाज का ताना सहने और उपेक्षा सुनने वाली ये गणिकाएं जब कथा सुन रही थीं तो कई बार कथा उनके अंदर ऐसी पैबस्त हुई कि सारा भाव आंख के आंसुओं से बहकर बाहर आता दिखाई पड़ा. कई बार वो ताली बजाकर झूमती गाती मगन नज़र आईं. यहां पहुंची गणिकाएं अपना सारा दर्द भूलकर अपने प्रति उपेक्षा का भाव रखने वाले लोगों को भी अपने बड़े दिल से माफ करती नज़र आईं. ऐसा ही एक सवाल पर गणिका शालू सिसोदिया करती हैं " ये अपनी-अपनी सोच है हम जो हैं वो हैं. हम किसी से कभी नहीं छुपाते कि हम क्या हैं. हम जो है सो हैं. ये सोच अपनी-अपनी है. आपको अच्छा समझना है या गलत समझना है, हमें बापू की कथा अच्छी लगी है.

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इन सभी गणिकाओं के अन्दर भी एक दिल धड़कता है जो प्यार चाहता है, सम्मान चहाता है. इनकी आंखें आज भी वही सपने देखती हैं जो सभ्य समाज के लोग देखते हैं. एक इंसान की ज़िन्दगी बसर करने का हक मिले, प्यार मिले तो क्यों ये इन बदनाम गलियों में उतरें. लेकिन यहां जिस तरह से इनको लेकर खबरें छपीं और इन्हें सेक्स वर्कर कहा गया इसका इन्हें बहुत मलाल है. ये इस बात से बेहद नाराज़ भी हैं.

भारी मन से सोनी कहती हैं कि "बापू ने बेटी का दर्ज़ा दिया है. बेटी होने पर और ख़ुशी मिल रही है. इतना मान सम्मान मिल रहा है. एकदम बच्चों की तरह रख रहे हैं. अपने बापू जी ने इतना सम्मान दिया है. लेकिन दूसरे लोगों ने क्या किया है. उसका गलत उपयोग किया है. अपनी खबरें बेचने के लिए अपना चैनल चलाने के लिए सेक्स वर्कर कह दिया है. यह अच्छी बात नहीं है. आपको और भी बात कहानी थी. अरे तारीफ़ लिखते कि इतनी लड़कियां शामिल हुई हैं बाबा के दरबार में.

टिप्पणियां

मोरारी बापू के इस प्रयास से वहां पहुंचे लोगों की सोच इनके प्रति बदलती भी दिखाई पड़ी. कथा सुनने आए किशना जालान ने कहा कि "ये हमारे लिए बिलकुल एक अछूत विषय था और हम तो कभी सोच भी नहीं सकते थे और एक गलत दृष्टि से ही हमेशा इनको देखा जाता था. बापू का जितना बड़ा प्रभाव है उसके कारण पूरे समाज में इनके प्रति लोगों की सोच निश्चित तौर पर बदलेगी.

मोरारी बापू की इस मानस गणिका से इनके लिए दिन के उजाले में रोशनी ज़रूर नज़र आ रही है. हालांकि अभी भी इनके मन में कई सवाल ज़रूर हैं. एक सवाल इनकी आंखों में तैरता नज़र आया कि जिस समाज ने उन्हें औरत से गणिका बनाया वही समाज उन्हें गणिका से औरत क्यों नहीं बनने देता. और शायद ताउम्र इनकी आंखें इस सवाल का जवाब ढूंढती नज़र आएंगी.

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