अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अवैध शरणार्थियों को लेकर दिया स्पष्टीकरण, कहा – गोली नहीं चलाएगी सेना 

1
- Advertisement -

डोनाल्ड ट्रंप ने शर्णार्थियों को लेकर दिया बयान

वाशिंगटन: अवैध शरणार्थियों (Refugee) को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( Donald Trump) ने अपना रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि देश में अवैध शरणार्थियों को प्रवेश करने से रोकने के लिए तैनात सैनिक उन पर गोली नहीं चलाएंगे. हालांकि अगर शरणार्थी सेना पर पथराव करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार करने से सेना पीछे नहीं हटेगी. ट्रंप ने शुक्रवार को यह टिप्पणी तब की जब इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अगर लोग सैनिकों पर पथराव करते हैं तो मैक्सिको के साथ दक्षिण पश्चिम सीमा पर तैनात सेना भीड़ पर गोलियां चला सकती है. उनकी इस टिप्पणी की उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों व मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की. ऐसा अनुमान है कि तीन लातिन अमेरिकी देशों अल साल्वाडोर, होंडुरास और ग्वाटेमाला से 5,000-7,000 के बीच शरणार्थियों का काफिला अमेरिका की ओर बढ़ रहा है.
यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप ने इस नेता से बातचीत को 'सबसे ख़राब' बताया, फोन की लाइन काटी
ट्रंप ने उन्हें रोकने के लिए दक्षिण-पश्चिम सीमा पर सेना तैनात की है. ट्रंप ने काफिले पर गोली चलाने के बारे में एक सवाल के जवाब में व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा- नहीं, वे गोली नहीं चलाएंगे. मैं नहीं चाहता कि ये लोग पत्थर फेंके. उन्होंने कहा कि मैक्सिको की सेना के साथ उन्होंने जो किया वह अपमानजनक है. उन्होंने उन्हें पत्थर मारे, कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए. वे उनके चेहरे पर पत्थर फेंक रहे थे. अगर वे हमारे साथ ऐसा करेंगे तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें गोली मार दिया जाएगा लेकिन हम ऐसे लोगों को तुरंत गिरफ्तार करेंगे और लंबे समय के लिए गिरफ्तार करेंगे.
यह भी पढ़ें: अमरीका में 14 लोगों को बम भेजने वाला एक ‘भक्त' पकड़ा गया है…
राष्ट्रपति ने कहा कि शासकीय आदेश के जरिए शरणार्थी नियमों में वह जो बदलाव कर रहे हैं वे कानूनी हैं. इस बीच, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शरणार्थियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों को मैक्सिको सीमा पर भेजने की ट्रंप की योजना की निंदा करते हुए उसे राजनीतिक तमाशा बताया. गौरतलब है कि शरणार्थियों को लेकर ट्रंप की पॉलिसी का शांति के लिए नोबल जीतने वाली मलाला यूसुफज़ई ने भी विरोध किया था. शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित पाकिस्तान की मलाला यूसुफज़ई ने कहा था है कि वह शरणार्थियों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से ‘बहुत दुखी'' हैं. मलाला ने ट्रंप से अनुरोध किया कि वह दुनिया के सबसे असुरक्षित लोगों को अकेला ना छोड़ें. पाकिस्तान में लड़कियों के लिए शिक्षा की खुलकर वकालत करने वाली 19 साल की मलाला को 2012 में तालिबानी आतंकवादियों ने सिर में गोली मार दी थी.
यह भी पढ़ें: अमेरिका: यहूदी प्रार्थना स्थल पर गोलीबारी में 11 लोगों की मौत, कई घायल
टिप्पणियां मलाला ने कहा ‘मैं अत्यंत दुखी हूं कि आज राष्ट्रपति ट्रंप हिंसा और युद्धग्रस्त देशों को छोड़कर भाग रहे बच्चों, माताओं और पिताओं के लिए दरवाजे बंद कर रहे है.'इस बाबत आदेश पर ट्रंप के हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद मलाला ने एक बयान में कहा ‘दुनियाभर में अनिश्चितता और अशांति के इस दौर में मैं राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध करती हूं कि वह विश्व के सबसे असहाय बच्चों और परिवारों की ओर से मुंह ना मोड़ें.' मलाला शांति के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता हैं. उन्हें भारत के शिक्षा कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से 2014 में यह पुरस्कार दिया गया था.अब इंग्लैंड में रह रही मलाला ने कहा ‘मैं बहुत दुखी हूं कि अमेरिका शरणार्थियों और प्रवासियों का स्वागत करने के अपने गौरवशाली इतिहास को पीछे छोड़ रहा है.
VIDEO: अमेरिका का ट्रिपल प्लान.
इन लोगों ने आपके देश को आगे ले जाने में मदद की और वे एक नयी जिंदगी का उचित मौका मिलने के बदले कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं.'व्हाइट हाउस ने इससे संबंधित आदेश को अभी सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन अमेरिकी मीडिया के हाथ लगे लीक ड्राफ्ट के मुताबिक यह आदेश कहता है कि जब तक नए नियम लागू न किए जाएं तब तक यूएस शरणार्थी पुनर्वास कार्यक्रम को कम से कम 120 दिनों के लिए स्थगित किया जाएगा. इसके अलावा यह आदेश सीरियाई शरणार्थियों को ट्रंप के अगले फैसले तक अमेरिका में घुसने के लिए प्रतिबंधित भी करता है.
Source Article

- Advertisement -