अमेरिका ने पाकिस्तानी पीएम को नहीं दी तवज्जो, एयरपोर्ट पर कोई लेने तक नहीं आया, मेट्रो से करना पड़ा सफर

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अमेरिका में इमरान खान को आम लोगों की तरह मेट्रो से जाना पड़ा.

नई दिल्ली :

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 3 दिन के दौर पर अमेरिका पहुंचे हैं. उनके ,एजेंडे में आंतक, अफ़ग़ानिस्तान में शांति और भारत के साथ रिश्तों पर चर्चा है, लेकिन जिस तरह से हवाई अड्‌ड़े पर पाक पीएम का स्वागत हुआ है उसको देख कहा जा रहा है ट्रम्प प्रशासन ने इमरान खान की अमेरिका यात्रा को कोई ख़ास तवज्जो नही दी है. दरअसल पैसा बचाने की मुहिम के तहत इमरान खान ने हाल में प्रधानमंत्री आवास की गाड़ी बेचने से लेकर भैंस तक बेची हैं और अब वो इस अमेरिकी दौरे को सबसे सस्ता दौरा बनाने की कोशिश में कमर्शियल फ्लाइट से वहां पहुंचे. ऐसे में हर सरकारी दौरे पर आ रहे मेहमान को एयरपोर्ट पर मिलने वाला स्वागत तक उन्हें नहीं मिला. बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान ख़ान का ये पहला अमेरिकी दौरा है.

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के पीएम इमरान खान अमेरिका के अपने पहले दौरे पर कमर्शियल फ्लाइट से जाएंगे

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आर्थिक संकट से जूझ रहे अपने देश की ख़स्ता हालत को देखते हुए वो प्रधानमंत्री के विशेष विमान के बजाय क़तर एयरवेज़ की फ़्लाइट से वॉशिंगटन पहुंचे, लेकिन एयरपोर्ट पर ना तो रेड कार्पेट दिखा और ना ही अमेरिका के आला अधिकारी. यही नहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को लेने अमेरिकी सरकार की कोई गाड़ी नहीं आई. लिहाज़ा इमरान खान को आम लोगों की तरह मेट्रो से जाना पड़ा. इमरान ख़ान की अमेरिका यात्रा पर ट्विटर में काफ़ी चुटकियां ली जा रही हैं. हालांकि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाक पीएम का बचाव किया. उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया कि, 'उन्होंने अपने देश का पैसा बचाया. इस मामले में उन्होंने किसी तरह का अहं नहीं दिखाया जैसा कि अधिकतर नेता दिखाते हैं. एक बार फिर मुझे याद दिलाएं कि यह कैसे ग़लत है. इस सबसे अमेरिकी सरकार की छवि ख़राब होती है इमरान ख़ान की नहीं.'

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पहले अमेरिकी दौरे पर होटल की बजाय पाक राजदूत के घर ठहरे पीएम इमरान खान

आपको बता दें कि तीन दिनों की इस यात्रा में इमरान ख़ान अमेरिका में पाक राजदूत के आवास पर ही रहेंगे. सोमवार को उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात होनी है जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और क़र्ज़ जैसे कई अहम मुद्दों पर बात होगी. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की भूमिका पर भी चर्चा काफ़ी अहम होगी. ये बातचीत ट्रंप के उस बयान के संदर्भ में और भी अहम हो जाती है जिसमें ट्रंप कह चुके हैं कि पाकिस्तान ने उन्हें झूठ और छल के अलावा कुछ नही दिया है.

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